शुक्रवार, 19 नवंबर 2010

बीस सालों से लूट-खसोट का अड्डा बना बीएचयू

विश्व की शैक्षणिक राजधानी और धरोहर के रूप में विख्यात काशी हिन्दू विश्वविद्यालय बीसों सालों से लूट -खसोट का अड्डा बन कर रह गया है। सन १९४६ में महामना के तिरोधान के बाद लगभग दसो साल तक तो उनके खडाऊं की आवाज यहाँ के करता धर्ता को सपने में भी सुनाई पड़ती थी ।लिहाजा उनके होश उड़े रहते थे और गलत करने की उनकी हिम्मत भी नहीं हो पाती थी। उसके बाद साथ के दशक से छात्र राजनीत के तेवर ने लोगों को ईमानदार बने रहने पर मजबूर कर रखा। विश्वविद्यालय प्रशासन की आख की किरकिरी तो सदैव से छात्र संघ रहा लेकिन उनकी एक न चलती थी। लेकिन कालांतर में,एक के बाद एक धृष्ट लोगों का पदार्पण होता रहा और, छात्रों का मंच गायब करने में ये लोग सफल रहे।
अब आज की दशा ये है की पूर्वांचल के एम्स के रूप में जाना जानेवाला यहाँ का अस्पताल भी इनके भ्रष्टाचार के आगोश में है। इमरजेंसी सेवाएँ एक दम से ठप कर दी गयी है,डाक्टर के कहने पर ही पुर्जा बनता है,अब ये कहे भी क्यों लिहाजा,सैट सौ से घाट कर इमरजेंसी के बिकनेवाले पर्चे की संख्या २०० हो गयी। इस तीन लाख रूपये के घटे का जिम्मेदार और कितने के मौत और कष्ट का जिम्मेदार कौन होगा । यह एक बड़ा प्रश्न है। ये महोदय लोग ये भी भूल गए की यह संस्था सरकारी खजाने से नहीं बल्कि मालवीय जी के कटोरे से बनी हुई है,जिसमे गरीब -अमीर सबका बरारर योगदान रहा है।
इन्ही सब कलीयों के खुलने के भय से ये आज चाहते हैं की छात्रसंघ न हो,अन्यथा इनको खून बेचकर ये कर्जे चुकाने हो जायेंगे।

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