गुरुवार, 11 नवंबर 2010
नाग नागिन मर गईले गोजरवा क तिलक चढ़े
देशवे में आग लागल बा हो .बड़े जोर से चिल्लात भय जुम्मन चाचा बोलवने। का हो अरे तोहरे गऊआ से के जीतल पर्धनियाँ में। हम कहे अरे चचा जनते बाड़ा की बिना पैसा क चुनाव जीतना बड़ा मुस्किल बा। बस अब का शुरू हो गईल चच्वा अपने अंदाज में.........देखा ये ग .....जी ,नाग नागिन मर गईलन गोजरवा क तिलक चढ़े तवने हाल हौ। तोहऊँ के कई बार कहली की लखनऊ वाला चुनौवा लड़ जा ,त पैसा जोहत .हौआ न ठीकेदारी करबा न ,दलाली तोहसे होखी ना, त पैसा कहाँ से आई। मास्ट ..........से चुनाव न लड़ाई। तोहसे बढ़िया कवन बोले वाला बा हो इ टाइम लेकिन तू बड़ा की तोहके अपने ताकत क अंदाजे ना हौ। हम कहे अरे चचा ,अब तोहार जमाना नहीं रहल। फिर शुरू,अरे हमरे टाइम राजनारायण अउर कमलापति गुरू एक दुसरे से लादे चुनाव में लेकिन ,राजनारायण जीववा पंडित जी से पैसो माग ले जरूरत पडले पर। आज के तरह दुश्मनी नाही रहे। पाहिले नेतवन जनता के पैसा से चुनाव लड़त रहलन ,अब त चोरवा सब गजले बाड़े खूब लुटावत हुवे,एन्हन के साथै कोई क संवेदना थोड़े बा।तू माग के चुनाव वाला संस्कृति फिर बढ़ाव गुरू ,जान ले की जीतही के हौ......... आव ,देख डग्दर साब आवत बड़े,चला उनकर पान भिदवल जाय,नाही त साला अकेल्वें खा के चल जाई । बारे जुम्मन चचा जियावा बनारस के।
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