मंगलवार, 9 नवंबर 2010

सुबहे बनारस

बाबा भोले के नगरी में जे जे आइल एहीं क होके रह गईल । सबेरे-सबेरे क लुभावे वाली आवाज .........का गुरू ....अकेले-अकेले ,भिडावा-भिडावा। एहीं महेंदर वाली दुकनियां पे हई,खाई के जल्दी से आवा। इ फक्कड़ी खाली येही के लोगन में बा ये भाई फाटल गमछा पहिरले पीछे से लल्लू सरदार का गुरुआ कल ओबमवा त साला हीरो हो गईल हो ,जेके देखा वोही ,ओकरे आउर ओकरे मेहरारू के बारे में चिल्लात जात बा,का करे सरवा आइल लहल हो,बड़ा पैसा खर्चा भायल होई। इहा बनारस में सरऊ ना आइलैं नहीं त बताईत की इहवां से जाये वाले लइकन का केराया तक सरवा अपने देशवा क बढाई देहलस हो ,अउर त अउर कहला की इहाँ क लोग डरग क कारोबारी बाड़ें । ओ सार के ऐसन नंगे पाव दौरैत न की होश पैतरे हो जात। करे मनमोहन अउर सोंयाँ उनकर खुशामद ,बनारस में त सबही ओबामा हौ..............................
इ मजा ,अउर भाषाई आकर्षन ,शिवाय बनारस के कहाँ बा ये भाई। ...............................

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