इस समय देश में कोई राजनैतिक मुद्दा राजनीतिज्ञों की नजर में नहीं है। तो इनको मुद्दा पैदा करना पड़ता है। तीन भारतीय स इस समय चर्चा के विषय बने हुए हैं। पहला संघ यानि डॉ हेडगेवार की अनूठी पहल एक तथाकथित गैर राजनैतिक सन्गठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ,दूसरा सुदर्शन जी जो पूर्वमें संघ के मुखिया रहे हैं। तीसरी सोनियां जी जो कांग्रेस अध्यक्ष और संप्रंग सरकार मुखिया रही हैं। सुदर्शन जी ने आनन् फानन में पता नहीं क्या सोचा की सोनियां जी के बारे में अनुचित टिपण्णी कर डाले। यद्यपि यह हर हाल में अनुचित है। लेकिन मानों कांग्रेसियों को ये हादसा पहले से पता था जो इसके लिए कमर बाढ़ लड़ने के लिए तैयार है। अरे भाई हो गया बुड्ढ़े पे तरस खाईये,राजनीति चमकाने का इससे भी बड़ा अवसर मिलता रहेगा। यद्यपि संघ की भूमिका को भी बहुत साफगोई से विचार करने पर मिलेगा की की यदि यह अपने को गैर राजनैतिक संगठन कहता है तो कभी-कभी भाजपा को छोड़ दूसरी पार्टी को भी सराहा करो भाई ओ भी गलती से ही सही, सही काम करते हैं ऐसा नहीं है सबके उद्देश्य गंदे ही हैं। भाजपा या किसी एक दल का मुख पात्र बनना तो शायद आपके संस्थापक प्रमुख रहे डॉ हेडगेवार साहब के वैचारिक भूगोल में रहा नहीं होगा।
सोनिया जी की पार्टी से उनकी सरकार से किसी का सरोकार हो या न हो लेकी सुदर्शन जी की टिपण्णी पर तो सारा देश चिल्ला रहा है की ये बहुत गलत हुआ ,अब क्या ..चाम की जीभ लाम जब चली ही गयी तो............
अतः छोडिये विरोध बुजुर्गों की गलतियाँ गलतियाँ नहीं होती,और ख़ास कर ऐसे हालत में जब उसके बच्चे ही कह रहे हों की उनके खिलाफ मुकदमा होना चाहिए।
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