शनिवार, 19 जनवरी 2013

चिंतन शिविर : चिंतन देश के हालात पर नहीं संगठन के हालात पर ,चिंता  राष्ट्र की नहीं सत्ता हाशिल करने की।
दूसरा चिंतन :एक चिन्तक के नजरिये से समूचे राजनैतिक दल एक गिरोह ,और वो खुद जिस दल के पैरवीकार रहे हैं वो भी गिरोह से अछूता नहीं।
नया विकल्प मिलेगा ,नया गिरोह रचने की तैयारी ,देश भी तैयार है ,,कुछ कुर्तों की जगह बेलबाटम ने अख्तियार कर लिया था उम्मीद है पुनः उसे कुरता मिलेगा ।देखते जाइये सबको कुछ न कुछ मिलेगा और मिलता रहेगा पर देश को,,,,,,,,,

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