बुधवार, 9 जनवरी 2013

गांधी बाबा क चरखा
रामनाम पंडित भुनभुनाये जा रहे थे ,गांधी बाबा क चश्मा सौ बरिस धूम मचवलस लइका पढ़े जाय त कबूत्तर खरहां के साथे च से चरखा पढ़ावल जाय ।वो समईया चरखा खोजे के न रहल ।अब त लईकवा कुल जान खाय जात हवे की इ चरखा का होला ,अब कहा से चरखा लियाय के देखाई इनहन के ई बवाल बा।येही बड़े लगत हाउ अंगरेजी माध्यम वाले च से चम्मच बतावे न ,अजदिया के बाद चमचावा त घर घर पहुच गईल।
गांधी बाबा के का पता की उनके मुअले  के बाद उनकर चरख्वा करोड़ों में बिकाइ ,नाही त कुछ जादा ही बनवा देहले होते ,वोही के बेच के सरकार चालत।तब तक कल्लू चाचा का धैर्य टूटा ,,का ये रामनाम का बडबडात हुआ मरदवा।इहां आव इ देखा बाइस लाख त खली टेक्स लेहलस सर्कार गाँधी बाबा के चरखा क ।अब्बो कहे की महगाई हाउ ,त गांधी बाबा क राज्घत्वा से कुछ हाड मॉस खोजे शायद कवनो बडहर खरीददार मिल जाय ,अरबों खरबों के साथ तेक्सवो ढेर मिली ,देशो चली सरकारों चली।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें