गांधी बाबा क चरखा
रामनाम पंडित भुनभुनाये जा रहे थे ,गांधी बाबा क चश्मा सौ बरिस धूम मचवलस लइका पढ़े जाय त कबूत्तर खरहां के साथे च से चरखा पढ़ावल जाय ।वो समईया चरखा खोजे के न रहल ।अब त लईकवा कुल जान खाय जात हवे की इ चरखा का होला ,अब कहा से चरखा लियाय के देखाई इनहन के ई बवाल बा।येही बड़े लगत हाउ अंगरेजी माध्यम वाले च से चम्मच बतावे न ,अजदिया के बाद चमचावा त घर घर पहुच गईल।
गांधी बाबा के का पता की उनके मुअले के बाद उनकर चरख्वा करोड़ों में बिकाइ ,नाही त कुछ जादा ही बनवा देहले होते ,वोही के बेच के सरकार चालत।तब तक कल्लू चाचा का धैर्य टूटा ,,का ये रामनाम का बडबडात हुआ मरदवा।इहां आव इ देखा बाइस लाख त खली टेक्स लेहलस सर्कार गाँधी बाबा के चरखा क ।अब्बो कहे की महगाई हाउ ,त गांधी बाबा क राज्घत्वा से कुछ हाड मॉस खोजे शायद कवनो बडहर खरीददार मिल जाय ,अरबों खरबों के साथ तेक्सवो ढेर मिली ,देशो चली सरकारों चली।
रामनाम पंडित भुनभुनाये जा रहे थे ,गांधी बाबा क चश्मा सौ बरिस धूम मचवलस लइका पढ़े जाय त कबूत्तर खरहां के साथे च से चरखा पढ़ावल जाय ।वो समईया चरखा खोजे के न रहल ।अब त लईकवा कुल जान खाय जात हवे की इ चरखा का होला ,अब कहा से चरखा लियाय के देखाई इनहन के ई बवाल बा।येही बड़े लगत हाउ अंगरेजी माध्यम वाले च से चम्मच बतावे न ,अजदिया के बाद चमचावा त घर घर पहुच गईल।
गांधी बाबा के का पता की उनके मुअले के बाद उनकर चरख्वा करोड़ों में बिकाइ ,नाही त कुछ जादा ही बनवा देहले होते ,वोही के बेच के सरकार चालत।तब तक कल्लू चाचा का धैर्य टूटा ,,का ये रामनाम का बडबडात हुआ मरदवा।इहां आव इ देखा बाइस लाख त खली टेक्स लेहलस सर्कार गाँधी बाबा के चरखा क ।अब्बो कहे की महगाई हाउ ,त गांधी बाबा क राज्घत्वा से कुछ हाड मॉस खोजे शायद कवनो बडहर खरीददार मिल जाय ,अरबों खरबों के साथ तेक्सवो ढेर मिली ,देशो चली सरकारों चली।
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