शनिवार, 22 जून 2013

मंगरू पहलवान  एक थैली में चार पांच दशहरी  आम लिए , थके हारे कही से घुमते हुए जंगली की पान दूकान पर पहुचे ही थे कि रामनाम गुरु टोके ,,का मंगरू कहाँ से आवत हौवा ,,आजकल त तोहार सरकार हौ अब कहे त्रस्त लगत बाड़ा । ,,,मंगरू हाफ्ते हुए चापे ,,का सबेरे सबेरे मेघा के तरह टरटराये लागला रामनाम ,,,तोहइ उहे रे जिम्मे  कवनो काम धाम न हाउ का ,,,,,तब ले पीछे से रोज राजनैतिक  सुन परिपक्क अंदाज में ,,,जंगली बोले ये रामनाम गुरु ,,अब तोहार बात कुल ख़ारिज हो गईल ,,,रामनाम इससे पहले की पूछते कौन बात,,,, मंगरू ही टपक पड़े ,,,कऊ वन बात हो ,,,उहे अब तोहार पार्टी अपने उप्पर से परिवारवाद क मोहर हटा देहलस ,,,जब अखिलेश अपने मौसा के ही निकरवा देहलन ,,,जंगली बोले ,,,मंगरू कवन मौसा हो,,अरे प्रमोद गुप्ता औरैया के बिधूना से विधायक ,,,,,तब ले मंगरू क थैला फाटल कुल दशहरी चित्राय गयल ,,,,,का ,,,,,,

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