गुरुवार, 17 दिसंबर 2015

इस चक्कर में प्रशासनिक अमला जो कही दबाव में था वह असि को पाटने की फिराक में लग गया ,कई जगह पाइप भी पड़  गयी । आठ करोड़ अस्सी लाख रूपये असि के नाम पर कहा खर्च किये गए इसका जवाब आज तक प्रशासन देने में नाकाम है । इसके बाद लोकसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन चुनाव सचेतक और वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने असि को भी अपने चुनाव का अखबारी एजेंडा बनाया ,,अब क्या था सारे दलों के सुर असि के लिए लयबद्ध हो गए । इस बीच बड़े मीडिया घराने से जुड़े एक चिकित्सक महोदय भी असि उद्धार का राग छेड़े और तो और एक बेहतर कार्य यह किये कि असल असि  गंगा संगम तट पर जहाँ आज उमाभारती जी से सम्बंधित भव्य मठ कब्ज़ा कायम किये हुए है उन्ही से अपने तथाकथित डॉक्यूमेंट्री जिसमे पहले ही उन्होंने असि को मुर्दा घोषित कर दिया है का लोकार्पण कराये । प्राइवेट अस्पतालों और चिकित्सकों की   वास्तविक स्थिति किसी से छिपी नहीं है ये पैसे के लिए लाश तक रोक लेते है ,उनके अंदर ये संवेदना देख अच्छा लगा लेकिन वहां की तो पूरी दाल ही काली निकली  ।
समझ में नहीं आता की जीवंत कहा जाने वाला ये शहर उस वक्त इतनी मुर्दा कैसे हो गयी जब  घटिया स्वार्थो की नियति पर इस नदी का राह मोड़ा जा रहा था । और ये अस्सी के बाद की सबसे बड़ी त्रासदी काशी के लिए कही जाय तो गलत नहीं होगा । असि के लिए किये गए सारे वायदे भी बाकि की तरह साहब ने  करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी । हद तो तब हो गयी जब हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी हम लोगों ने वहां देवदीपावली के दिन दीप  जलाया । इस कार्यक्रम को करने के सन्दर्भ में हम लोगों ने जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को पत्रक देकर वहां साफ सफाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया ,,आश्वासन भी मिला लेकिन एक झाड़ू भी प्रशासन की तरफ से नहीं लगा ,,वैसे तो पूरे देश में झाड़ू चल रहे हैं ।
अतः हम आप सभी विद्वतजनों ,नौजवान साथियो ,और मित्रों से असि उद्धार हेतु आवाहन करते है । ,,याचना नहीं अब रण  होगा--------

मंगलवार, 16 दिसंबर 2014

रामनाम गुरु और मटरू महराज की कई जनम की  दुश्मनी है ,,रहते साथ साथ है पर ,,,आज  सरेराह चाय की दुकान पर भिडंत ,,रामनाम बोले ,,का मटरू लगन में कमाई ढेर हो गईल का,रुख न मिलावत बाया ,,वैसे त चाय देखते सटे लागेला ,,लजाये से मटरू गुरु,, अरे यार थौसल आवा ,तू आव देखबा न ताव बोले शुरू,,एक ठे जमीन देखे गयल रहली ह ,,तवन महंग बा ,,लागत हउ हमसे ना खरीदायी ,,,रामनाम को जैसे बोर्ड के सारे प्रश्नो का हल एक साथ मिल  गया हो ,,, हेरोइन बेचे शुरू कई देहले हौआ का गुरु ,,मटरू भड़के ,,फिर बेमतलब,,हां त ई संकलप छोडवले से बनारस में जमीन न खरीदायी,,इहाँ मोसल्लम जमीन बिक गईल हाउ खली आसमान बाकि हाउ ,, वोहू के तैयारी कई देहले होइहे इहवा के सब धरतीपुत्र ,तोसे न निपटी ,,,हमर बात माना अब त मेट्रो चली ,,सारनाथ सिकिल रखी दिहा रोज गाँवे से आवा  जा,,,मटरू ई ताना नहीं झेल पाये ,,साला पनरह किलोमीटर क शहरे हऔ ,,,जेतना में सायकिल से हम पांडेपुर पहुँचब टाइम मेट्रो क टिकट कटावे में लगी जाई ,,,रामनाम ऐसे खुश हुए जैसे उनका  प्रयास सफल रहा हो ,,,तभी मटरू के फोन मोबइल की घंटी बजती है ,,बस आय गली,,दू मिनट में ,,,

सोमवार, 12 अगस्त 2013

फेक्कन पाडे सबेरे सीटी बजा बजा कर घर घर से शाखा लगाने के लिए लोगों को बुलाने के काम में माहिर प्राइमरी स्कूल के  अध्यापक रहे हैं ,,एक दिन देखा बडबडाये चले जा रहे थे ,,इ साला जहाँ देखा तहां मोदी मोदी रट  लगवले हवे कूल क कुल ,,कवं मंतर सुंघा देहले हव भाज्पैयन के भी समझ में नहीं आवत हौ ,,,,कुछ त इम्मन ऐसन हवे की गइयो हा भैसियो हां ,,,अरे एक कल्याण के ब्रम्हचारी जी हटवालन  यूपी से जनम जनम बदे  हाथ धोलेहलन ,,,,अब गुजरतओ जाई ,,,,,,ढेर ढेर जाने कई कई बार मुख्यमंत्री रहलन ,,लेकिन परधानमंत्री नहीं उ बने चाहलन नहीं उनकर पार्टी ,,,,,पीछे से रामनाम गुरु चिल्लाये ,,,कहो का भायल ,,अज केहू न मिलल का सीटी बजावे वाला ,,,,फेक्कन पाडे चिल्लाये ,,,सुना रामनाम तू हवा लंठ ,,तोहरे समझ में न आयी ,,,सीटी केतनो पिर्पिराई रही हाथवे में न ,,,त बड़ा के ,,,,,,फेक्कन गुरु में अचानक आये इस परिवर्तन पर विचार जारी है ,,,,

बुधवार, 26 जून 2013

सच मानिए बात थोड़ी बिचित्र है लेकिन लगभग सचित्र है  । कही एक  तस्वीर अभी थोड़ी देर पहले  देखा जिसमे उत्तराखंड में सैकड़ों महिलायें एक साथ बैठ कर कही कोई आटा गूथ रहा था तो कही कोई सब्जी बनाने में लगा हुआ था ,पुरुष वर्ग खिलाने पिलाने की जिम्मेदारी लिए था ,,एकाक्क बच्चे भी भूले भटके से तस्वीर में दिखे जिन्हें अंगुली पकड़ कर खाने की तरफ शायद बुलाया जा रहा था,वो भी एक दम खुले आसमान के नीचे । यूं तो सच में तस्वीर एक ही थी पर न जाने कितने भाव वो भर गयी । एक बात तत्काल दिमाग में कौधी की काश ऐसे हम हमेशा होते ,,,प्रकृति ने हमें समूची धरती और ,,समूचा आसमान दिया ,,बाग़  बगीचे दिए ,,नदी पहाड़ ,झरने दिए ,,ताल तलैया ,और न जाने क्या क्या दिया ,,,और हम है की एक चहारदीवारी और उसकी छत को सिर्फ अपना बनाने के लिए मरे जा रहे हैं ,सबको छले जा रहे हैं । वहां सब दुसरे का पेट भरने को आतुर दिख रहे थे ,,कहीं कोई स्वार्थ नहीं ,कहीं कोई अपना नहीं न कहीं कोई पराया । सच मानिए कहने में डर तो लग रहा है लेकिन अपने को रोक नहीं पा रहा हूँ ,,,अगर ये तबाही इतना कुछ सिखाती है तो इसकी जरुरत है ।

शनिवार, 22 जून 2013

मंगरू पहलवान  एक थैली में चार पांच दशहरी  आम लिए , थके हारे कही से घुमते हुए जंगली की पान दूकान पर पहुचे ही थे कि रामनाम गुरु टोके ,,का मंगरू कहाँ से आवत हौवा ,,आजकल त तोहार सरकार हौ अब कहे त्रस्त लगत बाड़ा । ,,,मंगरू हाफ्ते हुए चापे ,,का सबेरे सबेरे मेघा के तरह टरटराये लागला रामनाम ,,,तोहइ उहे रे जिम्मे  कवनो काम धाम न हाउ का ,,,,,तब ले पीछे से रोज राजनैतिक  सुन परिपक्क अंदाज में ,,,जंगली बोले ये रामनाम गुरु ,,अब तोहार बात कुल ख़ारिज हो गईल ,,,रामनाम इससे पहले की पूछते कौन बात,,,, मंगरू ही टपक पड़े ,,,कऊ वन बात हो ,,,उहे अब तोहार पार्टी अपने उप्पर से परिवारवाद क मोहर हटा देहलस ,,,जब अखिलेश अपने मौसा के ही निकरवा देहलन ,,,जंगली बोले ,,,मंगरू कवन मौसा हो,,अरे प्रमोद गुप्ता औरैया के बिधूना से विधायक ,,,,,तब ले मंगरू क थैला फाटल कुल दशहरी चित्राय गयल ,,,,,का ,,,,,,

शनिवार, 19 जनवरी 2013

चिंतन शिविर : चिंतन देश के हालात पर नहीं संगठन के हालात पर ,चिंता  राष्ट्र की नहीं सत्ता हाशिल करने की।
दूसरा चिंतन :एक चिन्तक के नजरिये से समूचे राजनैतिक दल एक गिरोह ,और वो खुद जिस दल के पैरवीकार रहे हैं वो भी गिरोह से अछूता नहीं।
नया विकल्प मिलेगा ,नया गिरोह रचने की तैयारी ,देश भी तैयार है ,,कुछ कुर्तों की जगह बेलबाटम ने अख्तियार कर लिया था उम्मीद है पुनः उसे कुरता मिलेगा ।देखते जाइये सबको कुछ न कुछ मिलेगा और मिलता रहेगा पर देश को,,,,,,,,,

शुक्रवार, 18 जनवरी 2013

वाह रे पूर्वांचल का एम्स
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय परिसर स्थित सर सुन्दरलाल अस्पताल पूर्वांचल के एम्स के रूप में जाना जाता है।लेकिन  लापरवाही और सेवा भाव हीनता का इससे शानदार नमूना शायद ही दुनिया में विद्यमान हो।चिकित्सक मरीजों के साथ ऐसा व्यवहार करते हैं मानों उनके ऊपर एहसान कर रहे हों।इतनी जलालत झेलने के बाद भी अगर रोगी ठीक होकर वापस जाए तो बात समझ में आती है ,मैं  ये नहीं कहता की यहाँ रोगी ठीक नहीं होते लेकिन कितने और बीमार होकर भी वापस लौटते हैं ।खैर ये ये भी कोई बड़ी बात नहीं है।सबसे बड़ा खतरा जो यहाँ पनपा है वो है सेवा भाव में आया लोप।
अभी कुछ दिन पहले बाल रोग विभाग के आई सी यूं से बिल्ली एक बच्चे को उठा ले गयी ,बच्चे की मौत हो गयी ,अस्पताल प्रशासन रिपोर्ट तैयार कर रहा है ।उससे भी पीछे जाएँ तो  सर्जरी के एक नामचीन चिकितसक महोदय जो आज अस्पताल के मुख्य प्रशासनिक पद पर आसीन हैं ने अपने कर कमलों से किडनी ट्रांसप्लांट करते समय डोनर और टेकर दोनों को सुर्धाम पहुचा दिए।पता नहीं वो जांच कहा पहुची।
पहले हड्डी विभाग में बहुत कम आपरेशन हुआ करते थे ,प्लास्टर से काम चल जाता था आज प्लास्टर न के बराबर होते  हैं आपरेशन धुआधार।हड्डी  विभाग के यहाँ के चिकित्सक महोदय एक  राड सर्जरी के लिए लिखते है जो नरिया स्थित एक दूकान पर मिलता है उसके अलावा कही भी अगर आप जाए तो कोई उनके लिखे को पढने वाला भी नहीं मिल सकता कारण कुछ लिखा ही नहीं होता सिर्फ उस सर्जिकल होउस में पहुचने मात्र से वो मिल सकता है।इस सबके पीछे भरी दलाली और कमाई का सवाल है।अच्छी कमपनिओन की सस्ती दवाओं के बजाय नकली कम्पनिओं के महंगी दवाओं को कमाने के चक्कर में लिख कर ये धरती के भगवान् सीधे स्वर्ग का धर्षण कराने पर आतुर हैं।अस्पताल के सामने स्थित हर एक दूकान के पास अपनी एक नीजी कंपनी है जिन्हें अस्पताल के किसी न किसी बड़े चिकित्सक का बर्धस्त प्राप्त ही।एक न्यूरो के नाम चीन चिकित्सक मंगलवार और शुक्रवार को यहाँ दर्शन देते हैं लगभग दो हजार मरीज इनके दर्शन को आते हैं।इनके अगर कार्यकाल को खंगाला जाय तो पता चलेगा की अपने विभाग से जुड़े आपरेशन ये  शायद दो चार किये और करते हो पर रोगियों पर इनका गजब का जादू है न्यूरो रोग का कद इन्होने बढ़ा  दिया है बचपन में हम लोग जिसे गंभीर रोग मानते थे कोई पढ़ा लिखा आदमी ही इसका नाम लेता था आज अनपढ़ भी कहता है इसका नाम।
ये वाकई पूर्वान्चल का एम्स हो चला है ,महामना के चिरजीवी सपने स्वास्थ्य और शिक्षा अपने दरवाजे पर ही हांफ रहे है,फिर भी मालवीय बरस मनाने में हमें फक्र है।