मंगलवार, 16 दिसंबर 2014

रामनाम गुरु और मटरू महराज की कई जनम की  दुश्मनी है ,,रहते साथ साथ है पर ,,,आज  सरेराह चाय की दुकान पर भिडंत ,,रामनाम बोले ,,का मटरू लगन में कमाई ढेर हो गईल का,रुख न मिलावत बाया ,,वैसे त चाय देखते सटे लागेला ,,लजाये से मटरू गुरु,, अरे यार थौसल आवा ,तू आव देखबा न ताव बोले शुरू,,एक ठे जमीन देखे गयल रहली ह ,,तवन महंग बा ,,लागत हउ हमसे ना खरीदायी ,,,रामनाम को जैसे बोर्ड के सारे प्रश्नो का हल एक साथ मिल  गया हो ,,, हेरोइन बेचे शुरू कई देहले हौआ का गुरु ,,मटरू भड़के ,,फिर बेमतलब,,हां त ई संकलप छोडवले से बनारस में जमीन न खरीदायी,,इहाँ मोसल्लम जमीन बिक गईल हाउ खली आसमान बाकि हाउ ,, वोहू के तैयारी कई देहले होइहे इहवा के सब धरतीपुत्र ,तोसे न निपटी ,,,हमर बात माना अब त मेट्रो चली ,,सारनाथ सिकिल रखी दिहा रोज गाँवे से आवा  जा,,,मटरू ई ताना नहीं झेल पाये ,,साला पनरह किलोमीटर क शहरे हऔ ,,,जेतना में सायकिल से हम पांडेपुर पहुँचब टाइम मेट्रो क टिकट कटावे में लगी जाई ,,,रामनाम ऐसे खुश हुए जैसे उनका  प्रयास सफल रहा हो ,,,तभी मटरू के फोन मोबइल की घंटी बजती है ,,बस आय गली,,दू मिनट में ,,,

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