गुरुवार, 3 नवंबर 2011
अपने करे त रासलीला दूसर करे त छिनारपन
अस्सी वाला पंडीजी मिललन शुरू कैलन कहे कहो इ रहूलवा का सन्कल हौ जब देखा तब सरपट भागत हौ ,कब्बो जवेद्वा के इहा जात हौ त कब्बों कन्हैय्वा क चाय पीयत हौ,इ सार सिकंदर बनल चाहत हवैं का गुरू?हमेशा सबके थरिया में खाय के चूतिया बनावत हौ ,कहत है की परदेस सरकार लुटेरी हवे ,अपने कौन चर्नामिरित बनावत हवे। हम कहे नहीं गुरु उ ठीक बा। गुरुआ बिग्दल कहे की अभ्यो तोहार कांग्रेस परेम गयल नाही । कहै की एक बात त ठीक हौ सुनली की एद्की बारी टिकट मांगे वालन के टी दूरे भागे देहलस,लेकिन एहू के दुसरे देश से बड़ा प्रेम बा हो। साला अपने करे त रासलीला और घुरहू करे त छिनारपन।
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