गुरुवार, 6 दिसंबर 2012

                                                                छक्कों का जलवा

ये छक्के भी जीना हराम कर दिए हैं,जहाँ भी देखिये क्या  बुड्ढ़े  क्या जवान सब छक्के में परेशां हैं।इन छक्कों के चक्कर में काम धाम छोड़ कर किसी भी सरकारी गैर सरकारी कार्यालय में लोग हाथ पे हाथ रखे निहारे जा रहे हैं,छक्को को।कुछ दिन पहले एक पुरनिये नेता जी से बात हो रही थी ,तो दुत्कार भरा जवाब एक साथी के अंग्रेजी के सवाल पर देते हुए उन्होंने कहा ,मेरी अंग्रेजी कमजोर है कारन ,जिस समय आप लोग छक्को को देख थपोड़ी  बजा रहे थे तब हम अंग्रजी हटाओ का नारा लगा रहे थे।वो भी छक्कों के आगे लाचार दिखे,,इसी अंदाज में मैं  उनको भीष्म कह डाला और वो नाराज चल रहे हैं।
कभी बचपन में बात बात में छक्के छुड़ाने की बात डरा जाती थी।आज इन डर लग रहा है नई पीढी गेद और बल्ले के इन छक्कों के चक्कर में कही छक्का ही न मार जाय,,,,,

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