तहलका को दिए गए एक साक्षात्कार में महाराष्ट्र के मुख्मंत्री पृथ्वीराज चौहाण ने बालासाहब ठाकरे को सम्मान देने के सवाल पर सफाई पेश करते हुए कहा कि एक कलाकार होने के नाते ठाकरे साहब को राजकीय सम्मान दिया गया ।यद्यपि इस मरने के बाद के सम्मान में मेरी कोई दिलचश्पी नहीं है ,लेकिन एक बचकाना सवाल मन में आया की मकबूल फ़िदा हुसैन से बड़े कलाकार तो ठाकरे साहब कत्तई नहीं थे ,लेकिन उनको कलाकारी का कितना बड़ा ईनाम दिया इस देश के नीति नियंताओं ने ये जग जाहिर है।हा एक कमी थी की क्षेत्रीयता का उनका दायरा नहीं था ,इसलिए वो किसी के नाथ नहीं थे,आसूओं के काफिले नहीं उठ पाए ,,ऐसे कितने कलाकारों को मिला सम्मान लोग बताये,,,शिवाय ,,,,,
गुरुवार, 6 दिसंबर 2012
छक्कों का जलवा
ये छक्के भी जीना हराम कर दिए हैं,जहाँ भी देखिये क्या बुड्ढ़े क्या जवान सब छक्के में परेशां हैं।इन छक्कों के चक्कर में काम धाम छोड़ कर किसी भी सरकारी गैर सरकारी कार्यालय में लोग हाथ पे हाथ रखे निहारे जा रहे हैं,छक्को को।कुछ दिन पहले एक पुरनिये नेता जी से बात हो रही थी ,तो दुत्कार भरा जवाब एक साथी के अंग्रेजी के सवाल पर देते हुए उन्होंने कहा ,मेरी अंग्रेजी कमजोर है कारन ,जिस समय आप लोग छक्को को देख थपोड़ी बजा रहे थे तब हम अंग्रजी हटाओ का नारा लगा रहे थे।वो भी छक्कों के आगे लाचार दिखे,,इसी अंदाज में मैं उनको भीष्म कह डाला और वो नाराज चल रहे हैं।
कभी बचपन में बात बात में छक्के छुड़ाने की बात डरा जाती थी।आज इन डर लग रहा है नई पीढी गेद और बल्ले के इन छक्कों के चक्कर में कही छक्का ही न मार जाय,,,,,
ये छक्के भी जीना हराम कर दिए हैं,जहाँ भी देखिये क्या बुड्ढ़े क्या जवान सब छक्के में परेशां हैं।इन छक्कों के चक्कर में काम धाम छोड़ कर किसी भी सरकारी गैर सरकारी कार्यालय में लोग हाथ पे हाथ रखे निहारे जा रहे हैं,छक्को को।कुछ दिन पहले एक पुरनिये नेता जी से बात हो रही थी ,तो दुत्कार भरा जवाब एक साथी के अंग्रेजी के सवाल पर देते हुए उन्होंने कहा ,मेरी अंग्रेजी कमजोर है कारन ,जिस समय आप लोग छक्को को देख थपोड़ी बजा रहे थे तब हम अंग्रजी हटाओ का नारा लगा रहे थे।वो भी छक्कों के आगे लाचार दिखे,,इसी अंदाज में मैं उनको भीष्म कह डाला और वो नाराज चल रहे हैं।
कभी बचपन में बात बात में छक्के छुड़ाने की बात डरा जाती थी।आज इन डर लग रहा है नई पीढी गेद और बल्ले के इन छक्कों के चक्कर में कही छक्का ही न मार जाय,,,,,
शनिवार, 1 दिसंबर 2012
पतोहिया बलबा मचाय देहलस
सुबह सुबह रामनाम गुरु नीम का दातून हिलाते ,,,,का हो तूफानी चाचा ,अरे पतोहिया त बालबा मचाय देहलस ,,,तोहू कहले न मानेल्या ,,हमेशा पतोही के पीछे परल रहेला।सबेरवे मुहे में डाल के हिलावत हवा ,बोले से पाहिले सोचेला न की का कहत हई ,,,तूफानी चचा चापे ,,रामनाम गुरु माहौल ख़राब होता देख,,,देखा चाचा तू दूसर मतलब निकाल लेहला ,,हम कहल चाहत रहली की ,,आज कल ढेर पतोही से झगरा रगरा मत फाना नहीं त मिसिर जी क हाल होई ....तूफानी चचा क परा गरम,,,इ कौने मिसिर जी के कुद्व्ले सबेरे सबेरे भाय ,,,समाचार वोमाचार पढ़ल करा मिसिर जी क पतोहिया ,डिम्पलवा बम्बई से बम्बैया अंदाज में आयल बाट़े .....ससुरा सोचलस की इह दुसर बियाह रचे के आनंद लेब के खोज पायी ,,,लेकिन आज कल क लईकी बाप रे .बाप ,,,,रामनाम गुरु चालू,,,तूफानी चचा भी तार से जुड़ गए ,,,हा यार हमहू कत्तो सुनाली का मामला हाउ,,
अब रामनाम गुरु का असाल पर्बचन शुरू हुआ,,कहे की इ राते रात हीरोईन बन गिल चचा ,,,मेहरारुन क त हर जगहे समर्थक मिल जाने,,इ कुल गौवन क एके हाल हाउ,,तूफानी चचा टपके अब तू केकर बुराई कायल चाहत हवा,,,बुराई नहीं निचोड़ जवन समझली वू दू ठे बा ,,,ऐसन करे में अब सबकर फ़ाटी ,,,दुसर बात एहिमे भीडिया आपन पुरनकी दुश्मनी भी निकल लेले।।।कुछो हो पतोहिया बालबा मचवलस न ...एक थे नजीर बनल न ....अबहीं देखा अब केतना सुतल डिम्पल सडकी प जियाब मोहल करिहे,,,तू सही कहत हवे गुरुआ मेहरारुन के चक्कर में न पड़े तबे ठीक।।।।।।
सुबह सुबह रामनाम गुरु नीम का दातून हिलाते ,,,,का हो तूफानी चाचा ,अरे पतोहिया त बालबा मचाय देहलस ,,,तोहू कहले न मानेल्या ,,हमेशा पतोही के पीछे परल रहेला।सबेरवे मुहे में डाल के हिलावत हवा ,बोले से पाहिले सोचेला न की का कहत हई ,,,तूफानी चचा चापे ,,रामनाम गुरु माहौल ख़राब होता देख,,,देखा चाचा तू दूसर मतलब निकाल लेहला ,,हम कहल चाहत रहली की ,,आज कल ढेर पतोही से झगरा रगरा मत फाना नहीं त मिसिर जी क हाल होई ....तूफानी चचा क परा गरम,,,इ कौने मिसिर जी के कुद्व्ले सबेरे सबेरे भाय ,,,समाचार वोमाचार पढ़ल करा मिसिर जी क पतोहिया ,डिम्पलवा बम्बई से बम्बैया अंदाज में आयल बाट़े .....ससुरा सोचलस की इह दुसर बियाह रचे के आनंद लेब के खोज पायी ,,,लेकिन आज कल क लईकी बाप रे .बाप ,,,,रामनाम गुरु चालू,,,तूफानी चचा भी तार से जुड़ गए ,,,हा यार हमहू कत्तो सुनाली का मामला हाउ,,
अब रामनाम गुरु का असाल पर्बचन शुरू हुआ,,कहे की इ राते रात हीरोईन बन गिल चचा ,,,मेहरारुन क त हर जगहे समर्थक मिल जाने,,इ कुल गौवन क एके हाल हाउ,,तूफानी चचा टपके अब तू केकर बुराई कायल चाहत हवा,,,बुराई नहीं निचोड़ जवन समझली वू दू ठे बा ,,,ऐसन करे में अब सबकर फ़ाटी ,,,दुसर बात एहिमे भीडिया आपन पुरनकी दुश्मनी भी निकल लेले।।।कुछो हो पतोहिया बालबा मचवलस न ...एक थे नजीर बनल न ....अबहीं देखा अब केतना सुतल डिम्पल सडकी प जियाब मोहल करिहे,,,तू सही कहत हवे गुरुआ मेहरारुन के चक्कर में न पड़े तबे ठीक।।।।।।
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