रविवार, 1 जुलाई 2012

बड बडवा बैठल रहे गोड कहे कथा

रामनाम गुरु चालू थे कल्लू मिया हाथ में केतली लिए उनकी धारा प्रवाह भाषण में लीन थे। रामनाम गुरु अपने में विरले प्रजाति के हैं,उनको सारी बाते अलगे खटकती हैं। कहे,,इक बात न समझ में आवत हौ यार इ परधानमंत्री क दूत पहुचल माथा पटकल बड़का बाबा कहने की तीन महिना क मोहलत भी मिलल बा उनकी तरफ से ,फिर इ छोटका बाबा फिर काहे का राष्ट्व्यापी आन्दोलन चिल्लात हवें । कल्लू मिया बोले,गुरु आज फिर तोहके गंगा क भूत सवार बा,काहे बौरायल हवा कुल धान एके पसेरी ना होत। गुरु चिल्लाये जा रहे थे सुना ये कल्लू आपन केतली सम्हारा तोहरे बस क इ कुल बात ना हौ,हमारे समझ में ये बड़े इ ना आवत हौ की बड बडवा बैठल रहे गोड कहे कथा..........